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गुल खिलाएगी फूलवती की उम्मीदवारी और साहेब की दमदारी

– स्वतंत्र एवं निष्पक्ष निर्वाचन के मार्ग में रोड़ा बन सकता है आजीविका प्रबंधक

अनिल द्विवेदी ब्यूरो,शहडोल। विधानसभा निर्वाचन 2023 के लिए नाम निर्देशन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया जारी है, कई उम्मीदवारों ने अपने नामांकन पर्चे दाखिल कर दिए और जो शेष बचे हैं 30 अक्टूबर को वह भी जमा कर ही देंगे। नाम निर्देशन पत्र दाखिले की अवधि समाप्त होने के पूर्व ही राजनीतिक स्थितियां कुछ कुछ समझ में आने लगी है। जिले के राजनीतिक पंडितों ने भले ही अभी चुप्पी साथ रखी हो लेकिन चाय-पाल के ठेलो गुमटियों में होने वाली चुनावी चकल्लस और पूर्वानुमानो की दौड़ बहुत कुछ कहानी बयां करने लगती है ऐसी ही एक कहानी मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के गोहपारू ब्लॉक प्रबंधक विनोद सिंह को लेकर भी चल पड़ी है। चुनावी चर्चाओं और मौजूदा हालात पर गौर किया जाए तो यह माना जा सकता है कि जिले के जयसिंहनगर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव पर सवालिया निशान लग सकता है।
जिले के जयसिंहनगर विधानसभा क्षेत्र के लिए भारतीय जनता पार्टी द्वारा श्रीमती मनीषा सिंह को अधिकृत प्रत्याशी घोषित किए जाने के साथ ही जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती फूलवती सिंह द्वारा बगावती तेवर अपना लिया गया और उन्होंने मीडिया के सामने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की घोषणा भी कर दी। इसी पत्रकार वार्ता में फूलवती सिंह ने यह खुलासा भी पूछे जाने पर किया कि ग्रामीण आजीविका मिशन ब्लॉक गोहपारू के प्रबंधक विनोद सिंह का उनको पूरा संरक्षण प्राप्त है। हमेशा वह सहयोग करते रहे हैं। और आगे भी उनसे बराबर का सहयोग मिलेगा। सूत्रों की मानें तो आजीविका प्रबंधक विनोद सिंह के क्षेत्राधिकार में बड़ी संख्या में महिला स्व सहायता समूह संचालित है जिनकी सदस्य महिलाओं से उनका व्यक्तिश: संपर्क होने की बात कही जा रही है और उन्हीं के दम पर श्रीमती फूलवती सिंह जो स्वयं महिला स्व सहायता समूह की सदस्य व पदाधिकारी हैं उन्हें पूरा विश्वास है कि 30000 स्व सहायता समूह बहनों का उन्हें सहयोग मिलेगा और वह बड़ी आसानी के साथ चुनाव जीत जाएंगी।

नेत्री की बात में है दम

आमतौर पर यह माना जाता है कि कोई भी राजनीतिक व्यक्ति किसी अधिकारी कर्मचारी का नाम लेकर राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर सकता है लेकिन श्रीमती फूलवती सिंह ने पत्रकार वार्ता में साहब (विनोद सिंह) का साथ और संरक्षण होने की जो बात कही है उसका तो पुख्ता प्रमाण भी है। जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीतने के बाद जब अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए जद्दोजहद चल रही थी तब ग्रामीण आजीविका मिशन के गोहपारू प्रबंधक एवं ठेकेदार विनोद सिंह द्वारा ही उन्हें राजनीतिक हस्तियों से मिलवाया गया था और राजनीतिक सौदेबाजी की गई, उसी के दम पर फूलवती सिंह को उन्होंने जिला पंचायत का उपाध्यक्ष बनने में भी सफलता अर्जित की थी ठीक उसी तर्ज पर अब वह इस नेत्री को विधानसभा में भी प्रवेश दिलाने के लिए प्रयासरत है।

क्षत्रिय शिक्षकों की लामबंदी

जयसिंहनगर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा की टिकट पाने में असफल जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती फूलवती सिंह ने जब निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी तो उनके पद और महिलाओं के बीच कथित जनाधार की संभावनाओं को देखते हुए विंध्य जनता पार्टी नामक नवोदित राजनीतिक दल ने उन्हें लपक लिया और अपनी पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर दिया। सूत्रों की माने तो विंध्य जनता पार्टी की टिकट भी ठेकेदार विनोद सिंह द्वारा ही मैनेज की गई और अब अपने प्रत्याशी को जिताने के लिए राजनीतिक मोर्चे पर जातिगत समीकरण बैठाने का प्रयास किया जा रहा है। इसी क्रम में आज गोहपारू ब्लाक के स्थानीय एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत क्षत्रिय वर्ग के शिक्षकों को पुराना बस स्टैंड के समीप एकत्र कर उन्हें विंध्य जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष राम नरेश शर्मा व अन्य नेताओं से मिलवाया गया। और निष्पक्ष चुनाव की नीति से दूर रहकर विंध्य जनता पार्टी उम्मीदवार श्रीमती फूलवती सिंह को विजयी बनाने के प्रयासों की सीख कथित तौर पर दी गई है।

क्या करेगा चुनाव आयोग

गौरतलब है कि ग्रामीण आजीविका मिशन गोहपारू प्रबंधक विनोद सिंह द्वारा स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव को प्रभावित किए जाने की आशंका को लेकर पूर्व में भी विभिन्न समाचार पत्रों द्वारा जिला प्रशासन व निर्वाचन अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कराया जा चुका है। सहायक निर्वाचन अधिकारी को दूरभाष पर भी जानकारी दी गई थी जिस पर सहायक निर्वाचन अधिकारी एवं अपर कलेक्टर श्री रोमानुष टोप्पो द्वारा मामले को संज्ञान में लेकर सख्त कार्यवाही किए जाने की बात कही गई थी लेकिन अब तक उसका परिणाम सामने नहीं आया। जबकि उक्त आजीविका मिशन प्रबंधक की राजनीतिक और अधिकारी कर्मचारी व लोगों को प्रभावित करने वाली गतिविधियां दिनों दिन जोर पकड़ रही है जो निश्चित तौर पर स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव के मार्ग में बाधक हो सकती है। अब देखना यह है कि निर्वाचन आयोग या जिला स्तर पर निर्वाचन अधिकारी इस मामले में क्या कार्यवाही करते हैं।

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