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करोड़ों का अवैध लाभ लेकर बनीं फूलवती सिंह जिपं उपाध्यक्ष…?

– कावेरी महिला स्व सहायता समूह में अपात्र होकर भी शामिल, करोड़ों हड़पे

शहडोल। महिला आत्मनिर्भरता एवं आर्थिक सशक्तिकरण अभियान के तहत महिला स्वसहायहता समूहों के गठन में नियमों और सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट की धज्जियां उड़ाते हुए संपन्न परिवार की महिलाओं को अवैध तरीके से आर्थिक लाभ दिलाने का कार्य किया गया है, जिसकी एक बानगी जिला पंचायत शहडोल की उपाध्यक्ष फूलवती सिंह भी हैं जिन्हें न सिर्फ नियम विरुद्ध तरीके से समूह में जोड़ा गया बल्कि समूह की पात्र महिलाओं के हक पर डाका डालते हुए करोड़ों रुपए का अनुचित लाभ भी दिलाया गया है। आरोपित किया गया है आर्थिक रूप से संपन्न एवं आयकर दाता परिवार की सदस्य होने के बावजूद श्रीमती फूलवती सिंह ने अनैतिक रूप से करोड़ों रुपए का लाभ अर्जित किया है जिसकी शिकायत आजीविका मिशन एवं राज्य शासन से की गई है।

मध्य प्रदेश शासन द्वारा स्व सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ग्रामीण आजीविका मिशन को शासन द्वारा महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। आजीविका मिशन के अधिकारी कर्मचारियों ने महिलाओं को कितना आत्मनिर्भर बनाया या उनका कितना उद्धार किया वह अपनी जगह है, नई जानकारी यह है कि आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की बाट जोह रही महिलाओं के बीमा के नाम पर अरबो रुपए का घोटाला कर दिया गया जो न सिर्फ न्यायालय में विचाराधीन है बल्कि आजीविका मिशन और मध्य प्रदेश शासन के गले की हड्डी बना हुआ है। ग्रामीण आजीविका मिशन के अधिकारी कर्मचारियों ने महिला स्व सहायता समूह के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के अभियान के नाम पर एक नहीं कई गुल खिलाए हैं जिसकी झलक शहडोल जिले में भी देखने को मिलती है जिले में नियम विरुद्ध तरीके से संपन्न परिवार की महिलाओं को सहायता समूह की महिलाओं को मिलने वाला लाभ तो दिलाया ही गया उनके नाम पर करोड़ों रुपए का घपला भी किया गया है इस गोरख धंधे में शहडोल जिला पंचायत की उपाध्यक्ष श्रीमती फूलवती सिंह का नाम सुर्खियों में है।
क्या है मामला
शहडोल जिले में महिला स्वयं सहायता समूहों के नाम पर हुई अनियमितताओं को लेकर भोपाल के सोशल एक्टिविस्ट भूपेंद्र यादव ने उजागर करते हुए राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत भेजी है। शिकायत में शहडोल जिले के गोहपारू जनपद पंचायत क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत भुरसी की कावेरी स्व सहायता समूह का नाम भी शामिल है। कावेरी स्व सहायता समूह की मुख्य कर्ताधर्ता जिला पंचायत शहडोल की उपाध्यक्ष श्रीमती फूलवती सिंह को बताया गया है। फूलवती सिंह न तो आर्थिक रूप से कमजोर है और नहीं उनका या परिवार का नाम गरीबी रेखा की सूची में है। श्रीमती फूलवती सिंह के पति शासकीय शिक्षक और आयकर दाता भी है। राज्य शासन द्वारा कराए गए सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण सूची में नाम न होने के बाद भी श्रीमती फूलवती सिंह को महिला स्व सहायता समूह में शामिल किया गया है जबकि नियमत: सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण में शामिल न होने वाले किसी भी महिला को इस योजना का लाभ नहीं मिल सकता। बावजूद इसके फूलवती सिंह को कावेरी स्व सहायता समूह में शामिल किया गया और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से करोड़ों रुपए का आर्थिक लाभ अनैतिक रूप से दिलाया गया है।
योजना एक नजर में
पंचायत एवं विकास विभाग एवं राज्य आजीविका मिशन द्वारा मध्य प्रदेश के गरीब महिलाओं को समूह के द्वारा लाभान्वित किया जाता है। मध्यप्रदेश में 4 लाख 78 हजार स्व सहायता समूह है तथा 57 लाख महिला समूहों में जुड़ी है प्रत्येक समूह को शासन द्वारा चक्रीय राशि, समुदाय निवेश राशि, स्टार्टर फंड राशि अनुदान स्वरूप एकलाख प्रति समूह के अनुमान से अरबो रुपये महिलाओं के नाम से जा किया जा चुका है, साथ ही इन समूहों को बैंको के माध्यम से कम व्याज पर प्रति समूह लाखों रुपये लोन लगातार दिया जाकर लाभान्वित किया जा रहा है।
महिलाओं को समूह में जोड़ने हेतु पात्रता
गरीब ग्रामीण महिलाओं को समूह में जोड़ने हेतु एवं आजीविका मिशन कार्य करने हेतु लाभार्थी होने के लिये अन्य सरकारी योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत आवास का लाभ, स्वच्छ भारत मिशन अंतर्गत शौचालय का लाभ, उज्वला योजनानुसार गैस कनेक्शन का लाभ एवं कई अन्य योजनाओ की तरह ही केंद्र सरकार द्वारा सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण सूचकांक 2011 में वास्तविक लक्षित परिवार के निर्धारण हेतु दिशानिर्देश तैयार किए गए, जिसमें यह उल्लेखित है, कि सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण सूचकांक का प्रयोग करते हुए वास्तविक गरीब परिवारों का चयन करते हुए उनके परिवार से गरीब महिलाओं को समूह के द्वारा किया जाना महिलाओं को समूह में जोड़ने हेतु ठीन सूचकांक बनाए गए हैं जो की निम्र प्रकार क्रमश: स्वत: पृथक सूचकांक, स्वतः सम्मलित सूचकांक एवं बंधन सूचकांक हैं। गरीब ग्रामीण महिलाओं को समूह में जोड़ने हेतु एवं इन गरीब महिलाओं को छोटे काम धंधों के आजीविका प्रदान करने एक रूप तक अनुदान राशि व बैंक के माध्यम से कम पर लाखो रुपय ऋण प्राप्त कराया जाता है परन्तु इसके लिए यह अत्यन्त आवश्यक है की महिला का परिवार बीपीएल 2011 के सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण सूचकांक एसईसीसी मे महिला का नाम हो या महिला का परिवार सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण सूचकांक एसईसीसी के हिसाब से पात्र हो।
यह हैं दिशानिर्देश
वास्तविक लक्षित परिवार के निर्धारण हेतु आजीविका मिशन द्वारा भी दिशा निर्देश तैयार किए गए है। दिशा निर्देशों में यह स्पष्ट उल्लेखित है कि सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण सूचकांक का प्रयोग करते हुए वास्तविक गरीब परिवारों का चयन करते हुए उनके परिवार से गरीब महिलाओं को समूह में जोड़ा जाएगा एवं लाभान्वित किया जाएगा महिलाओं को समूह में जोड़ने हेतु एवं बाहर करने हेतु तीन सूचकांक बनाए गए है। सशक्त, आयकर दाता शामिल
शहडोल जिले में एसईसीसी-2011 सामाजिक आर्थिक जातिगत सूचकांक के नियमों की धज्जियां उड़ाई गई और आर्थिक रूप से सशक्त एवं आयकर दाताओं के परिवार की महिलाओं को समूह में जोड़ा गया तथा एसईसीसी-2011 के नियम अनुसार जो महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो चुकी है,उन्हें समूह में नहीं रखे जाने हेतु भी दिशा निर्देश बनाए गए हैं। शहडोल जिले के विकासखंड गोहपारू के गांव भुरसी में कावेरी स्व सहायता समूह संचालित है परंतु इस समूह को नियम विरुद्ध बनाया गया है। जिसमें गांव की महिला जिसका नाम श्रीमति फूलवती सिंह गौड है, यह महिला आर्थिक रूप से सक्षम परिवार से है तथा इनके पति योगेश्वर सिंह 1988-1989 से शिक्षक है तथा वर्तमान में हाई स्कूल बरकोड़ा जनपद गोहपारू जिला शहडोल में शिक्षक के पद पर पदस्थ हैं।
करोड़ों का अवैध लाभ
आरोपित किया गया है, कि फूलवती सिंह गोंड ने जो न सिर्फ जागरूक महिला बल्कि जिला पंचायत उपाध्यक्ष भी हैं, सभी नियम पता होते हुए भी जानबूझकर समूह में सम्मिलित होकर अनैतिक रूप से करोड़ो रुपये के वित्तीय लाभ लिया है।
चुनाव में भी गलत जानकारी
आरोपित तो यह भी किया गया है, कि फूलवती सिंह वर्तमान में जिला पंचायत सदस्य हैं तथा जानकारी में आया है,की इनके द्वारा पंचायत चुनाव में गलत जानकारी देकर चुनाव लड़ा गया तथा समूहों की हजारों माहिलाओं को बरगलाकर वोट प्राप्त किये गए हैं। फूलवती सिंह के पति योगेश्वर सिंह जो जिला शहडोल के जनपद गोहपारू के हाई स्कूल बरकोड़ा में पदस्थ हैं।
घोटाले का असली सूत्रधार
आजीविका मिशन के जिला शहडोल के विकासखंड गोहपारू के ब्लॉक प्रबंधक संविदा कर्मी जो कि विगत कई वर्षों से इसी ब्लॉक में पदस्थ है के द्वारा नियमों का उलंघन करते हुए जानबूझकर श्रीमती फूलवती सिंह को समूह में जोड़ा गया है। इन्हें ग्राम संगठन एवं क्लस्टर लेवल फेडरेशन (फेडरेशन के माध्यम से करोड़ो रूपय का लेन देन होता है में पद दिया गया है तथा नियम विरुद्ध वित्तीय लाभ दिया गया है। तथा सिंह साहब द्वारा करोड़ो रूपये का अवैध रूप से वित्तीय लाभ लेकर करोड़ो की अवैध संपत्ति फूलवती सिंह एवं आजीविका मिशन के माध्यम से अर्जित की जो की गोहपारू ब्लॉक की 1800 समूह की 20 हजार एसटी, एससी, ओबीसी की गरीब ग्रामीण माहिलाओं के हक का पैसा था। सिंह साहब की संपत्ति की सूक्ष्म जाँच आवश्यक है।

शिकायत की प्रति विशेष पुलिस महानिदेशक एसटीएफ को प्रेषित कर मांग की गई है कि फूलवती सिंह, आजीविका मिशन गोहपारू के ब्लॉक प्रबंधक संविदा कर्मी तथा योगेश्वर सिंह के विरुद्ध लोक हित में सूक्ष्म जाँच हेतु उपयुक्त जाँच एजेंसी से कराने का कष्ट करें।

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