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बोड्डिहा का ठेका सरवाही में खदान, तो..क्या फिर जाएगी किसी की जान…?

“सोन की सुनहरी रेत को रक्त रंजित कर देने वाली दो हृदय विदारक घटनाओं के बाद भी शहडोल जिले में रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रशासनिक मेहरबानी पर जारी रेत ठेकेदार कंपनी की मनमानी ने भले ही बड़े-छोटे रेत माफियाओं अथवा कारोबारियों की मौजूदगी और सक्रियता का भ्रम फैला रखा हो, वास्तविकता यह है कि संबंधित विभागों और जिला प्रशासन की सहमति से रेत माफियाओं को नेस्तनाबूद कर चुकी ठेकेदार कंपनी ने स्वयं के रेत माफिया तैयार कर लिए हैं और जब कभी वह कानून की गिरफ्त में आते हैं तो उनकी सुरक्षा के लिए ठेकेदार कंपनी के लोग आ जाते हैं वरना कारोबार तो चल ही रहा है। सवाल यह उठता है की सोन की सुनहरी रेत अब किसकी बलि लेने की तैयारी कर रही है…? यदि अवैध उत्खनन और कारोबार पर अंकुश नहीं लगा तो आशंकाओं के पुष्ट होने में समय नहीं लगेगा।”

शहडोल। जिले के विभिन्न अंचलों विशेष कर ब्यौहारी क्षेत्र में चल रही रेत की अवैध खदानों से उत्खनन और बड़े पैमाने पर परिवहन ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इस अवैध कारोबार के चलते क्षेत्र में बढ़ रही अराजकता और अनिष्ट की आशंका को देखते हुए जनपद पंचायत ब्यौहारी की अध्यक्ष आकांक्षी सिंह ने संभाग आयुक्त एवं स्थानीय विधायक को एक ज्ञापन सौंप कर रेत के अवैध कारोबार पर तत्काल प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की है।
जनपद पंचायत अध्यक्ष आकांक्षी सिंह ने अपने ज्ञापन में कहा है कि ग्राम बोड्डिहा तहसील ब्यौहारी जिला शहडोल में भूमि खसरा क्रमांक 233 रकवा 4.500 हे. में संचालित सहकार ग्लोवल लिमिटेड कंपनी की रेत खदान जो बनास नदी में स्थिति है. उसमें सहकार ग्लोवल लिमिटेड कंपनी द्वारा अवैध रूप से निर्धारित स्थान से अन्य जगह सरवाही खुर्द स्थित आराजी खसरा क्रमांक 596 में खनन किया जा रहा है। जो पूर्णतः गलत है एवं पोड़ी, चरकवाह खदान से वाहनों में ओवर लोड रेत का परिवहन किया जा रहा है। जिससे आये दिन ब्यौहारी क्षेत्र में दुर्घटना हो रही है।

धरना आंदोलन की चेतावनी

जनपद अध्यक्ष  ने संभागायुक्त बी.एस. जामोद एवं क्षेत्रीय विधायक शरद जुगलाल कोल से अनुरोध किया है. कि ग्राम बोड्डिहा में संचालित खदान से ही रेत का खनन किया जाय एवं सरवाहीखुर्द में जो अवैध खनन किया जा रहा है. उस पर रोक लगायी जाय एवं उक्त खदानों से ओवर लोड रेत का परिवहन बंद कराया जाय। अवैध रेत उत्खनन एवं ओवर लोड परिवहन पर अगर 7 दिवस के अंदर रोक नही लगायी गई, तो मुझे रेत खनन एवं ओवर लोड परिवहन में रोक लगाने हेतु धरने पर बैठने को मजबूर होना पड़ेगा। जिसकी समस्त जबावदारी प्रशासन की होगी।

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