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हिन्दुस्तान के 15 लाख शैक्षणिक संस्थानों में ‘विकसित भारत केंद्र’ अनिवार्य रूप से स्थापित हो – डीन आचार्य (डॉ.) विकास सिंह

अनूपपुर। भारत सरकार के मिनिस्ट्री आफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी के द्वारा प्रायोजित प्रोजेक्ट के अंतर्गत ‘विकसित भारत 2047 के सन्दर्भ में वैश्विक रणनीतियाँ, नवाचार और उद्यमशील पारिस्थितिकी तंत्र पर अंतर्राष्ट्रीय परिचर्चा’ का आयोजन 16 मार्च 2024 को किया गया। परिचर्चा को संबोधित करते हुए स्वावलंबी भारत अभियान तथा स्वदेशी जागरण मंच के महाकौशल प्रांत के सहसंयोजक तथा भारत सरकार प्रोजेक्ट के मुख्य अन्वेषक एवं केंद्रीय विश्वविद्यालय के कंप्यूटर विज्ञान संकाय डीन आचार्य (डॉ.) विकास सिंह ने बताया कि भारत की अमृत-पीढ़ी सवा सौ करोड़ ‘ज्ञान’ जी फॉर गरीब, वाई फॉर युवा, ए फॉर अन्नदाता, एन फॉर नारीशक्ति पर ध्यान कर ईएलसीडी एंटरप्रेन्योरशिप (उद्यमिता), लोकल (स्वदेशी), कोऑपरेशन (सहकारिता), डिसेंट्रलाइजेशन (विकेंद्रीकरण) फार्मूला से सतत विकास लक्ष्य, जीवनयापन में आसानी, व्यापार करने में आसानी, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण के साथ 2047 तक भारत को बेरोजगारी मुक्त, शून्य गरीबी रेखा तथा 40 ट्रिलियन डॉलर की विश्व की सबसे बड़ी इकोनॉमी खड़ा किया जा सकता है।

नैक एक्रिडिएशन देने शिक्षण संस्थानों में उद्यमी बनाने की अनिवार्यता हो

आचार्य (डॉ.) विकास सिंह ने आगे बताया कि वर्तमान में उच्च और तकनीकी शिक्षा संस्थानों में पढ़ाई मतलब नौकरी ‘प्लेसमेंट सेल’ ऐसा वातावरण निर्मित है इसे बदलकर संस्थान में पढ़ने वाले छात्रों को नौकरी के साथ-साथ उद्यमी बनाए जाने पर विशेष बल दिया जाना जरूरी है, छात्रों के लिए नौकरी का अवसर देने के नाम पर प्लेसमेंट सेल की व्यहारिकता राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिपेक्ष्य में अब उपयुक्त नहीं रह गई है। बल्कि हिन्दुस्तान के 15 लाख शैक्षणिक संस्थानों में ‘विकसित भारत केंद्र’ अनिवार्य रूप से स्थापित किया जाना उपयुक्त है क्योंकि भारत में 15 वर्ष से 29 वर्ष आयु के 37 करोड़ युवा है, जिन्हें रोजगारयुक्त उद्यमी बनाया जाना जरूरी है। औपचारिक और अनौपचारिक कुल नौकरियों की संख्या लगभग 10 करोड़ है जबकि जॉब सीकर के रूप में 37 करोड़ युवा है, ऐसी परिस्थिति में सभी को नौकरी नहीं मिल सकती है इसकारण पढ़ाई मतलब नौकरी इस गलत मानसिकता से छात्रों को निकालने के लिए ‘प्लेसमेंट सेल’ के स्थान पर ‘विकसित भारत केंद्र’ स्थापित किया जाना अत्यंत आवश्यक हो गया है। भारत सरकार, राज्य सरकारों की योजनाएं, स्थानीय संसाधन, नवाचार, लोकल टेक्नोलॉजी, चतुष्पंक्ति मार्ग विकेंद्रीकरण – स्वदेशी – उद्यमिता और सहकारिता आधारित उद्यमी बनने की जिम्मेदारी शिक्षण संस्थानों की तय हो तथा नेक एक्रीडिटेशन देने में इसको सम्मिलित किया जाए जिससे एक साथ 1113 विश्वविद्यालयों, 43,796 कॉलेजों और 11296 स्टैंडअलोन संस्थानों से लगभग 3 करोड़ माइक्रो, स्मॉल और मीडियम साइज की उद्यमी एक वर्ष में तैयार हो सकेंगे और यह सभी कार्य शिक्षण संस्थानों के विकसित भारत केंद्र से संचालित होगा।

सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण जागरूकता, स्व का जागरण, नागरिक कर्तव्य एवं शिष्टाचार विकसित भारत के लिए आवश्यक

अहिल्याबाई होल्कर तकनीकी सत्र को संयुक्त रूप से संबोधित करते हुए शोध विद्वान चिन्मय पांडे तथा अवनीश श्रीवास्त्री ने बताया कि ‘विकसित भारत केंद्र’ के माध्यम से केजी से पीजी तक के छात्रों को सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण विषय को प्रैक्टिकल कराकर छात्रों और युवाओं में ‘स्व का जागरण’ करना अनिवार्य है क्योंकि विकसित राष्ट्र की परिकल्पना शाश्वत रूप में तभी साकार हो सकेगी जब पूरे देश में सुमति स्थापित रहे। भारत के लोग यह समझे कि वे सभी समान पूर्वजों के ही वंशज हैं तथा हम सभी के डीएनए में एक समानता है इसके लिए भारत में उपलब्ध दस्तावेज के आधार पर सामाजिक समन्वय के लिए ‘पूर्वजों को जानने का अधिकार कानून’ भी पारित होना चाहिए, पूर्वजों की 21 पीढ़ी तक के वंशावली से सटीक ढंग से साबित किया जा सकेगा कि भारत में रहने वाले सभी पूजा पद्धति के लोग हिंदू ही हैं।

2047 तक भारत की एक तिहाई एनर्जी ग्रीन हाइड्रोजन आधारित होगी – प्रो. मोहन कोल्हे

अंतर्राष्ट्रीय परिचर्चा को संबोधित करते हुए यूनिवर्सिटी आफ एग्दर नॉर्वे के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो मोहन कोल्हे ने बताया कि भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन लक्ष्य हासिल करने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन शुरू किया गया है। ग्रे हाइड्रोजन, ब्लू हाइड्रोजन, ग्रीन हाइड्रोजन से बिजली तथा ईंधन के उत्पादित होने से 2047 तक 300 गीगावॉट की संबद्ध नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता, 10 एमएमटी (मिलियन मीट्रिक टन) की हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता, एक करोड़ से अधिक नौकरियों का सृजन, जीवाश्म ईंधन के आयात में एक लाख करोड़ रु. की कमी आ सकेगी। भारत दुनिया में हरित हाइड्रोजन का अग्रणी उत्पादक और आपूर्तिकर्ता, ग्रीन हाइड्रोजन और उसके डेरिवेटिव के लिए निर्यात के अवसरों का निर्माण, आयातित जीवाश्म ईंधन और फीडस्टॉक पर निर्भरता में कमी, स्वदेशी विनिर्माण क्षमताओं का विकास, उद्योग के लिए निवेश और व्यापार के अवसरों को आकर्षित करेगा तथा 2047 तक भारत की एक तिहाई एनर्जी ग्रीन हाइड्रोजन आधारित होगी।
संगोष्ठी में शोध विद्वान बैजनाथ राम ने सीताराम टेक्नोलॉजी से रामराज की स्थापना की संदर्भ में विषय का प्रस्तुतीकरण दिया तथा शोध विद्वान ऋतुराज सोंधिया ने शिव टेक्नोलॉजी के माध्यम से ‘सस्टेनेबल एग्रीकल्चर’ तथा ग्रीन हाइड्रोजन आधारित फर्टिलाइजर, यूरिया और अमोनिया के संदर्भ में विषय का प्रस्तुतीकरण दिया। इसके अलावा सेंसर इंजीनियर राजीव किस्सी, डैशबोर्ड मैनेजर खेलन सिंह ओरके, एग्रो साइंटिस्ट ओमप्रकाश पाठक तथा आलोक द्विवेदी, गजेंद्र मिश्रा सहित अन्य छात्र सम्मिलित थे।

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