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फुनगा क्षेत्र में हो रहा लाखों का खेल, जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल

छत्तीसगढ़ तक इनके जुंये के ठीहो की चर्चा
अनूपपुर। इन दिनों छत्तीसगढ़ की सीमा से लेकर मध्यप्रदेश की सीमा क्षेत्र को मिलानें वाले तमाम क्षेत्रों में बावनपरी का नेटवर्क जमकर चर्चाओं में है। खास बात यह है कि इस अनैतिक कारोबार का सरगना कोतमा बदरा क्षेत्र से अपनें तमाम शागिर्दों के माध्यम से इस कारोबार को संचालित किये हुये हैं। सूत्र बताते हैं कि जिम्मेदारों के बीच गहरी पैठ रखने वाला अतुल अपनें कमलेश नामक साथी सहित कुछ चुनिंदा लोगों के साथ मिलकर बड़े बेखौफ तरीके से बावनपरी का खेल संचालित किये हुये हैं, लेकिन स्थानीय जम्मेदार इस दिशा में कोई कार्यवाही नहीं कर पा रहे हैं। जानकारों नें बताया कि अतुल और कमलेश का नाम बावनपरी की दुनियां में कोतमा फुनगा सहित इस तमाम क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाये हुये हैं। और यह दोनों इन बावनपत्तों से मोटी कमाई के ऐसे मास्टरमाइंड है जो इन दिनों लाखों की कमाई कर रहे हैं। जानकारों नें बताया कि इनके पास बावनपरी के कारोबार के संचालन के वो तमाम तजुर्बे हैं जिससे इनके इस खेल पर कभी रोक नहीं लग सकी। अपने व्यापक नेटवर्क और तमाम फाइनेंसरों के बल पर इसका कारोबार इन दिनों छत्तीसगढ़ की सीमा क्षेत्र से लेकर कोयलांचल के कोतमा, फुनगा अनूपपुर तक संचालित है। सूत्र बताते हैं कि अपनें इस कारोबार की चैकन्नी व्यवस्था के लिये इसके द्वारा बकायदें नियुक्तियां की है जो हर समय इसके कारोबार के लिये रोजाना नये तरीके व ठीहों की व्यवस्था करनें के साथ सुरक्षा व निगरानी का पूरा जिम्मा उठाये हुये हैं। जानकार बताते हैं कि बीते कुछ माह से इनके बावनपरी के ठीहे फुनगा थाना क्षेत्र के गोडारु नदी के आसपास के क्षेत्रों, बदरा ग्राउंड व पयारी बस स्टैण्ड ग्राउंड से महज 4 -5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित जंगलों में संचालित हो रहा है। जहां सुबह 11 बजे से कोतमा, बिजुरी, बदरा सहित छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़ व चिरमिरी तक के शौकीन शार्टकट में मोटी कमाई के फेर में लाखों की रकम लेकर पहुंचते हैं। जानकार बताते हैं कि अपनें पूरे नेटवर्क और कुशल मैनेजमेंट के माध्यम से अतुल के जुंये के ठीहे में रोजाना लाखों का वरा न्यारा रो रहा है लेकिन स्थानीय जिम्मेदार मूकदर्शक बनें बैठे हैं। सूत्रों नें बताया कि जहां उक्त समूचे क्षेत्र में बावनपरी की मण्डी की रौनक समूचे क्षेत्र में चर्चाओं में हैं, वहीं इस कारोबार में लाखों का वारा न्यारा हो रहा है। जानकार बताते हैं कि अतुल व कमलेश के एक फड़ में कम से कम तीस से चालीस आसामी होते हैं जिनके बीच लाखों के दांव लगाये जाते हैं। वहीं बतौर सुविधा व सुरक्षा के नाम पर शरताज व नीलेश नामक शख्स पूरा जिम्मा उठाये हुये हैं। अंदर कि वशूली से लेकर बाहर के मैनेजमेंट में बतौर सहयोगी पूरा काम देखते हैं। सूत्रों नें बताया कि इनके ठीहे की चमक बरकरार रहनें के कई कारण है, सुरक्षा व सुविधा का वादे और दावा के साथ ठीहे में फाइनेंस का भी पूरा इंतजाम होता है। कई बार जुंये प्रेमियों को पैसा घट जानें पर वाहनों की गिरवी से पैसे तो कभी घनिष्टों को मोटे ब्याज पर फाइनेंस भी किया जाता है। जानकारों नें बताया कि इस सुविधा के लिये एक अलग टीम तैयार की हुई है, जो फाइनेंस सुविधा अपलब्ध करानें के साथ वशूली तक का जिम्मा उठाये हुये हैं। ऐसा माना जाता हैं कि वर्दीधारियों का खुफिया सूचना तंत्र सबसे मजबूत होता है, इतना ही नहीं इनका व्यापक नेटवर्क भी होता है, लेकिन इसे विंडबना ही माना जाये कि जिम्मेदारों का यह तंत्र अतुल और कमलेश के नेटवर्क के आगे बौना साबित हो रहा है। सूत्र बताते हैं कि बीते लंबे समय से बावनपरी के इस कारोबार का संचालन फुनगा थाना क्षेत्र में अपनी सुविधा के अनुसार अलग-अलग स्थानोे में कर रहा है, इतना ही नहीं इसके इस संचालित ठीहों पर जहां क्षेत्र के अलग अलग इलाकों के तमाम लोगों की आवाजाही होती है वहीं इसकी जानकारी स्थानीय जिम्मेदारों को नहीं होती इस पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। बहरहाल एक तरफ जहां अतुल और कमलेश का नेटवर्क समाज को खोखला करनें की दिशा में बड़ा कदम उठाये हुये हैं वहीं स्थानीय जिम्मेदारों द्वारा इस दिशा में कार्यवाही न होना कई सवालों को जन्म दे रहा है।

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