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बीच जंगल में घेर लिया गया वनराज बजरंग

– बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघ और पर्यटकों की जिंदगी से खुला खिलवाड़…

– जिप्सी संचालकों और गाइड्स ने पर्यटकों के साथ रोका जंगल के राजा का रास्ता

– टल गई अनहोनी वरना हो सकता था हादसा, पार्क प्रबंधन की लापरवाही उजागर

…विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में विचरण कर रहे वनराज यानी मेल टाइगर बजरंग को पर्यटकों से भरी जिप्सियों से चौतरफा घेर कर न सिर्फ बाघ बल्कि लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने का दुस्साहस किया गया है। टाइगर रिजर्व के ताला रेंज में हुई इस दुस्साहसिक घटना ने वन्य जीव संरक्षण कानून, टाइगर रिजर्व कानून और वन्य प्राणियों की सुरक्षा के दावों की तो धज्जियां उड़ाई ही वन्य जीव प्रेमियों को भी आश्चर्य में डाल दिया है। टाइगर स्टेट का दर्जा प्राप्त मध्यप्रदेश के बांधवगढ़ नेशनल पार्क में हुई बाघ और पर्यटकों की जिंदगी से खिलवाड़ की इस घटना ने पार्क प्रबंधन एवं उसके मैदानी अमले की कथित कर्तव्य परायणता की पोल खोल कर रख दी है साथ ही यह संदेश भी दिया है की जिप्सी संचालक चालकों और गाइड का रेंज ऑफीसरों पर कितना और किस प्रकार का दबाव बरकरार है।

राहुल सिंह राणा/अनिल द्विवेदी

शहडोल/बांधवगढ़ जनसम्पर्क एक्सप्रेस।टाइगर स्टेट मध्यप्रदेश के विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ नेशनल पार्क में मंगलवार को शाम की ट्रिप में पर्यटकों की जिंदगी के साथ तो खिलवाड़ किया ही गया अगर वाइल्डलाइफ नियमों की माने तो बाघ को घेर कर जिस तरह से जिप्सी संचालकों द्वारा बाघ को खतरे में डालने का काम किया गया है और वाइल्डलाइफ के नियमों को तोड़ा गया है वह अपने आप में आश्चर्यजनक है। 12 दिसंबर की शाम की पारी में जोन ताला में बजरंग मेल टाईगर को जमुनिया रपटा के पास वाहन चालकों, गाइडों ने दोनों तरफ से घेर कर पर्यटको को फोटोग्राफी कराई।
यह तो खुशकिस्मती है उन पर्यटकों और बाघ की कि लोगों और जिप्सियों से घिर जाने के बाद भी वनराज बजरंग भड़का नहीं। अगर कहीं उसने पर्यटकों पर छलांग लगा दी होती तो किसी भी पर्यटक की जान भी जा सकती थी और लोगों के भड़कने पर बाघ का अनचाहा शिकार भी हो सकता था।
सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर जब इस मामले में संबंधित ताला रेंज के वन अधिकारी से इस संबंध में चर्चा की गई तो पहले तो उन्होंने मामले की पुष्टि के लिए फोटो की मांग की और जब उन्हें फोटो उपलब्ध करा दी गई तो उन्होंने चुपचाप किनारा कर लिया। इस मामले की कार्यवाही रेंजर ताला श्री श्रीवास्तव को करनी थी लेकिन उन्होंने कार्यवाही करने के बजाय मामले में टाल मटोल की।

हादसे का कौन होता जिम्मेदार

जिस क्षेत्र में इस बाघ को दोनों तरफ से घेर कर पर्यटकों को लुभाने की कोशिश की गई उसी पल अगर बाघ ही उग्र होकर कोई घटना कर बैठता और कोई पर्यटक लहू लुहान हो जाता या जान से हाथ धो बैठता तो उसका जिम्मेदार कौन होता। जाहिर है की सूचना मिलने के बाद रेंजर ताला को इस मामले में तत्काल कार्यवाही करनी चाहिए थी लेकिन उन्होंने कार्यवाही के बजाय मामले को दबाने का प्रयास शुरू कर दिया। जिन जिन व्यक्तियों, जिप्सी चालकों ने उस बाघ को घेरने का काम किया वहां पार्क के में लगे जीपीएस से स्पष्ट देखा जा सकता है। जीपीएस में यह भी स्पष्ट हो जाएगा की जिप्सियों का नंबर क्या था, जिप्सी किसकी थी, उसमें गाइड कौन था तथा ड्राइवर कौन था ताकि इस मामले में सख्त कार्यवाही की जा सके। वैसे सूत्रों की बातों पर यदि यकीन करें तो इस कथित वारदात में सुनील यादव वाहन चालक, विजय सिंह ताला गाइड, प्रमोद यादव वाहन चालक, उनके गाइड का रजिस्टर में चेक करे, पुष्पनारायण वाहन चालक व गाइड मंजीत सिंह शामिल बताए जाते हैं।
कार्यवाही में कोताही
बांधवगढ़ में जिस तरह से जिप्सी संचालकों ने पार्क के अंदर पर्यटकों और जानवरों को मजाक बनाया हुआ है वह अपने आप में आश्चर्यजनक है। सूत्रों की माने तो बांधवगढ़ के अंदर जो तमाशा चल रहा है उसको नियंत्रित करने में पार्क प्रबंधन किसी प्रकार की कोई ऐसी कार्यवाही नहीं कर रहा है जिससे जंगल के अंदर के कानून एवं वाइल्डलाइफ के नियमों का पालन किया जा सके। पार्क के अंदर लगे कैमरे भी इस बात के सबूत हैं कि किस तरह जिप्सी से वहां बाघ को घेरने का काम किया गया।

ब्लैकलिस्टेड होना चाहिए

इस मामले में रेंजर ने पहले तो फोटो मांगी, फोटो देने के बाद जिस तरह से मामले को टालमटोल करने का काम किया वह अपने आप में कई सवालों को जन्म देता है। नियम तो कहता है कि जिन जिप्सी संचालकों, ड्राइवरों एवं गाइडों ने बाघ को घेरने का काम किया है उनको ब्लैकलिस्टेड किया जाना चाहिए। इस मामले में सीसीएफ से कई बार संपर्क साधने का प्रयास भी किया गया लेकिन सीसीएफ ने फोन उठाना ही उचित नहीं समझा।

इनका कहना है-
यह एक अत्यंत गंभीर मामला है इसकी जांच जरूर होगी। रेंजर ताला द्वारा आवश्यक कार्यवाही की जाएगी यदि वह किसी प्रकार की लापरवाही या बचाव करते हैं तो उनके विरुद्ध भी कार्यवाही की जाएग

रमेश गुप्ता, पी.सी.सी.एफ. वाइल्ड लाइफ

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